इस बार सोलह श्राद्ध 15 दिन, पितरों को धूप पूर्णिमा से अमावस्या तक 16 दिन लगेगी

इस बार सोलह श्राद्ध 15 दिन, पितरों को धूप पूर्णिमा से अमावस्या तक 16 दिन लगेगी

किस दिन कौनसी तिथि का श्राद्ध करें

26 सितंबर पूर्णिमा का श्राद्ध,
27 को प्रतिपदा का श्राद्ध,
28 को द्वितीय का श्राद्ध,
29 को तृतीया का श्राद्ध एवं भरणी श्राद्ध,
30 सितंबर चतुर्थी का श्राद्ध मध्याह्न उपरांत पंचमी,
1 अक्टूबर पंचमी का श्राद्ध (दोपहर 12.30 तक), दोपहर 12:30 पर छठा का श्राद्ध आरंभ,
2 को सप्तमी का श्राद्ध,
3 को अष्टमी,
4 को नवमी,
5 को दशमी,
6 को एकादशी,
7 को द्वादशी,
8 को त्रयोदशी,
9 अक्टूबर को चतुर्दशी का श्राद्ध और
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध किया जा सकेगा।

श्राद्ध-तर्पण के दौरान कुश अत्यधिक महत्वपूर्ण है। विधि-विधान से किए जाने वाले तर्पण में कुश का उपयोग अनिवार्य है। तर्पण के समय आसन कुश का होना चाहिए। तर्पण के समय दोनों अनामिका अंगुलियों में पहनने वाली पवित्रा भी कुश की बनी होती है। जल देते समय कुश को स्थिति विशेष में रखते हैं और जल ऐसे गिराया जाता कि वह कुश का छूता हुआ ही जाए। अग्नि पुराण में वर्णन है श्राद्ध के दौरान अंगूठे के माध्यम से पितरों को जल अर्पित करने से आत्मा को तृप्ति मिलती है।
■■□□■■

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *